..... कुछ बूँदें मेरे मन के सागर से

क्यूँ आंसुओ से गम धुल नहीं पाते ?
क्यूँ बारिश की बूंदों के साथ वो घुल नहीं जाते ?
काश की उन्हें भी कुछ बहा ले जाती ,
तो कम से कम वो गम हमे याद तो न आती ...

5 comments:

योगेश स्वप्न said...

achchi hai.

मनोज कुमार said...

यथार्थ लेखन।

boletobindas said...

याद हर खाली वक्त में अपना समय काटने आ जाती है....पर हमारे लिए किसी चुभन से कम नहीं होती....अभी बीमारी मे यादों की परछाईयों ने बहुत तंग किया..

संजय भास्कर said...

हर शब्‍द में गहराई, बहुत ही बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

हृदय पुष्प said...

सोच बहुत सुंदर - और प्रभावशाली बनायें.

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..Discovering within... ;) Well I have completed my Integrated B.Tech-M.Tech (Biotech) and now working as CSIR-SRF in BIT, Mesra.Though I am very naive to write poems, but I found this medium the best to express the feelings (mine as well as others). So your valuable suggestions/comments are most welcome :-)

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